सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ी धज्जियां: जमकर आतिशबाजी से खुश हुए भाजपा नेता, सांसद को नहीं आया पसंद

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में दिवाली के मौके पर जमकर आतिशबाजी हुई है। इसके चलते एनसीआर, आगरा, मेरठ जैसे तमाम शहरों में एक्यूआई भी बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद भी पटाखे जलाए जाने पर लोग चिंता जता रहे हैं तो वहीं भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने इसकी तारीफ की है। कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘दिल्ली आप पर गर्व है। यह विरोध की आवाजें हैं। अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की आवाजें हैं। लोग बहादुरी के साथ अवैज्ञानिक, अतार्किक और तानाशाहीपूर्ण बैन का उल्लंघन कर रहे हैं। हैपी दिवाली।’

अपनी इस पोस्ट में कपिल मिश्रा ने पटाखे जलाने का जिक्र नहीं किया, लेकिन बैन के उल्लंघन से साफ था कि वह इसी की बात कर रहे हैं। इस बीच टीएमसी के सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि भाजपा के सांसद और मंत्री बैन का उल्लंघन कर रहे हैं। यह राजधानी दिल्ली में ही हो रहा है। गोखने ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘धन्यवाद दिल्ली (खासतौर पर भाजपा के सांसद और मंत्री), बीते 6 घंटों में लगातार पटाखे जलाने के लिए। यदि सत्ताधारी दल के लोग ही इस तरह से नियमों का उल्लंघन राजधानी में करेंगे तो फिर आम लोगों पर क्या असर होगा। एक्यूआई 999 दिखा रहा है। इससे ज्यादा मशीन रीड नहीं कर सकती।’
शायद भाजपा के नेताओं को लोगों को संकट में डालने से ही त्योहार का मजा आता है। एक अन्य पोस्ट में गोखले ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि पटाखे पर बैन के उल्लंघन के कितने मामले सामने आए हैं और पुलिस ने उन पर क्या ऐक्शन लिया है। गोखले ने अपने पत्र को शेयर करते हुए लिखा, ‘दिल्ली पुलिस को इस पर तत्काल जवाब देना चाहिए और जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि शहर गैस चेम्बर में तब्दील हो गया है। आज की सुबह दिल्ली के लोग जहरीली हवा में फिर सांस लेने को मजबूर हुए। एक्यूआई 999 के पार है। सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद भी पटाखे खूब बिके और जलाए गए। रात को मेरे पड़ोस में कई भाजपा सांसदों और मंत्रियों ने खूब देर तक पटाखे जलाकर दिवाली मनाई।’
टीएमसी सांसद ने लिखा कि भाजपा के नेता खुलेआम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। लेकिन दिल्ली पुलिस भाजपा नेताओं के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं ले रही। हम जानना चाहते हैं कि दिल्ली पुलिस अपना काम क्यों नहीं कर रही। इनकी वजह से दिल्ली के लाखों लोग गैस चेम्बर में जीने को मजबूर हैं।