गैस्ट्रिक कैंसर से रहे सावधान, करे ये आसान उपाय

हैदराबाद। पेट का कैंसर या जिसे गैस्ट्रिक कैंसर के नाम से भी जाना जाता है कैंसर के सबसे जटिल प्रकारों में गिना जाता है. इसे कैंसर से संबंधित मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी माना जाता है. लेकिन Stomach Cancer को उन कुछ कैंसरों में भी गिना जाता है जिनके होने या बढ़ने को आहार, जीवनशैली और स्वच्छता स्थितियों में मामूली सुधार से रोका या नियंत्रित किया जा सकता है. पेट के कैंसर के कारण ज्यादा से ज्यादा जनहानी को रोकने के लिए ना सिर्फ आमजन में उसके इलाज व बचाव से जुड़ी जानकारियों को लेकर ज्यादा जागरूकता फैलाने की जरूरत है, बल्कि इस दिशा में बेहतर जांच व इलाज की संभावनाओं को लेकर चर्चा तथा शोध के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संगठनों को प्रेरित करने के लिए प्रयास भी बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य के साथ हर साल नवंबर माह को ” स्टमक कैंसर अवेयरनेस मंथ या पेट का कैंसर जागरूकता माह ” के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यह आयोजन Stomach Cancer से प्रभावित लोगों के लिए जोखिम कारकों, इसके इलाज व रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व को समझने तथा इन प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बिल्डिंग योर कम्युनिटी ” थीम पर मनाया जा रहा है.

आंकड़ों की माने तो वर्ष 2018 में विश्व में इसके लगभग 1.03 मिलियन मामले संज्ञान में आए थे तथा इसके कारण लगभग 783,000 लोगों को जान गवानी पड़ी थी. वहीं वर्ष 2019 में इससे जुड़े 12.7 लाख मामले संज्ञान में आए थे जिनमें से लगभग 9,57,000 लोगों की जान गई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2020 में पेट के कैंसर के लगभग 1.09 मिलियन मामले सामने आए थे जिनमें से लगभग 769,000 लोगों को इसके कारण जान गवानी पड़ी थी. पेट के कैंसर या Gastric Canceror के लक्षणों को समझ कर सही समय पर इसका सही इलाज शुरू करवाने पर इसके जानलेवा प्रभाव से बचा जा सकता है. लेकिन आमतौर पर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को हल्की-फुल्की समस्या समझ कर अनदेखा कर देते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे आम पाचन संबंधी समस्याओं जैसे बहुत आम लक्षण होते हैं और लोग उन्हे कैंसर की आशंका से जोड़ कर नहीं देख पाते हैं. वही ज्यादातर लोगों को पेट के कैंसर से जुड़े लक्षणों के बारें में ज्यादा जानकारी भी नहीं होती हैं. जिसके चलते पहले इसके लक्षणों को समझने और फिर रोग की जांच व इलाज में देरी हो जाती है . वहीं इस कैंसर के बढ़ने व शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने की रफ्तार की काफी तेज होती है. यही कारण है कि इसके कारण कारण होने वाली मृत्यु की दर ज्यादा है. इसलिए कुछ अन्य कैंसर के प्रकारों के मुकाबले कम प्रचलित होने के बावजूद इसके कारण उच्च मृत्यु दर के चलते पेट का कैंसर दुनिया भर में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंता माना जाता है. ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि इसके जोखिम कारकों, लक्षणों, इलाज व प्रबंधन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया जाए।
इसी उद्देश्य के साथ वर्ष 2010 में नो स्टमक फॉर कैंसर – NSFC संस्था द्वारा पेट कैंसर जागरूकता माह की स्थापना की गई थी. चूंकि पेट का कैंसर तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है, इसलिए इसकी गंभीरता समझते हुए इसे लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाने तथा इससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा की पहल करने के उद्देश्य से NSFC ने अमेरिकी सीनेट के साथ मिलकर “नेशनल स्टमक कैंसर अवेयरनेस मंथ” की स्थापना की थी. इसके उपरांत वर्ष 2011 तक कई और संगठनों ने भी इस आयोजन में अपनी भागीदारी देना शुरू किया.गौरतलब है कि वर्ष 2012 में सबसे पहली बार वार्षिक नो स्टमक फॉर कैंसर वॉक का आयोजन किया गया था, जिसमें अमेरिका के 35 राज्यों के तथा दुनिया भर के 10 देशों के प्रतिभागी शामिल थे. इस अवसर पर इस उद्देश्य के लिए पेरिविंकल नीले रंग के रिबन को सांकेतिक प्रतिनिधित्व के लिए भी नामित किया गया था. वर्तमान समय में दुनिया भर में ना सिर्फ कैंसर के क्षेत्र में कार्य करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं व चिकित्सकों के संगठनों द्वारा बल्कि कई अन्य सामाजिक संस्थाओं तथा विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा भी Stomach Cancer Awareness Month के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम, दौड़, सेमीनार तथा जांच शिविरों आदि का आयोजन किया जाता है।