ढाई लाख ठेका मजदूर, 80 हजार को ही वेतन वृद्धि का मिलेगा लाभ

धनबाद: कोल इंडिया व अनुषंगी कंपनियों में लगभग ढाई लाख ठेका मजदूर हैं. वहीं वेतन वृद्धि का लाभ बमुश्किल 80-90 हजार ठेका मजदूरों को ही होगा, जो ऑन रोल हैं. यह ट्रेड यूनियनों का मानना है. यूनियन नेताओं का ही आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनियां काम करनेवाले सभी ठेका मजदूरों को ऑनरोल नहीं दिखाती हैं. इस कारण आधे से ज्यादा ठेका मजदूरों को अबतक सामाजिक सुरक्षा के दायरे (पीएफ-ग्रेच्युटी) में नहीं लाया जा सका है. सीएमपीएफ में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में एक लाख से कम ठेका मजदूर दर्ज हैं. वैसे ठेका मजदूरों के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इनकी संख्या घटती-बढ़ती रहती है. मसलन चार-पांच साल तक चलने वाले प्रोजेक्ट के बंद होने पर यदि उक्त आउटसोर्सिंग कंपनी को कोई और नया प्रोजेक्ट नहीं मिलता है, तो मजदूर बेरोजगार हो जाते हैं. इस तरह के मामले भी काफी हैं. एक और समस्या यह है कि कई आउटसोर्सिंग कंपनियां अब भी सीएमपीएफओ की जगह अपने ठेका मजदूरों का ईपीएफओ में नाम दर्ज कराया है. ईपीएफओ के मुकाबले सीएमपीएफओ में बेहतर सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं हैं.
13 से कोल इंडिया व अनुषंगी कंपनियों में काम करने वाले ठेका मजदूरों के लिए एचपीसी (हाई पावर कमेटी) से अनुशंसित वेतन लागू करने का प्रावधान किया गया.

तीन नवंबर को कोल इंडिया में कंज्यूमर मीट होगा
कोल इंडिया ने तीन नवंबर को कंज्यूमर फीडबैक के लिए कंज्यूमर मीट का आयोजन किया है. सतर्कता जागरुकता माह के तहत कार्यक्रम आयोजित हो रहा है. देशभर के कोयला कंज्यूमर भाग ले सकते हैं. साथ ही ऑनलाइन फीडबैक भी दे सकते हैं. इसके लिए कंपनी ने आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक जारी किया गया है.
40 को ही वेतन वृद्धि का लाभ लखन लाल महतो
एटक नेता सह जेबीसीसीआई सदस्य लखन लाल महतो ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा 40 ठेका मजदूरों को ही वेतन वृद्धि का लाभ मिल पाएगा. ठेका मजदूरों की वास्तविक संख्या और ऑनरोल ठेका मजदूरों की संख्या में काफी अंतर होना मुख्य वजह है. पहले से ही आउटसोर्सिंग कंपनियां ऐसा करती रही हैं. हाईपावर कमेटी वेतन लागू हुआ है.