गांवों की हवा की गुणवत्ता बताएंगे सेंसर

पटना: अब गांवों की हवा खराब है या अच्छी इसके बारे में सटीक जानकारी मिलेगी. अभी तक बिहार में सिर्फ बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों तक का ही आंकड़ा मिलता है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और कानपुर आईआईटी की ओर से सूबे के 534 प्रखंडों के 538 जगहों पर सेंसर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन लगाने का काम पूरा कर लिया है.
सूबे में लगे सभी सेंसर से प्राप्त आकड़े कानपुर आईआईटी के पास जाएंगे. वहां वैज्ञानिक इस पर शोध करेंगे. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्राप्त वायु प्रदूषण के कारण और समाधान के उपाय करने के लिए कार्ययोजना बनाएगा. गांव से लेकर शहर तक वायु गुणवत्ता की स्थिति पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नजर रखेगा. प्रखंडों में जो सेंसर लगाए गए हैं वे ज्यादातर व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित हैं. एक छोटा सा बॉक्स लगाया गया है, जिसकी मदद से उस प्रखंड में हवा की गुणवत्ता की जानकारी मिल सकेगी.

प्रदूषण का कारण पता चलने पर किया जाएगा समाधान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और हाजीपुर समेत 22 जिला मुख्यालयों के 35 स्थलों पर स्वचालित वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन लगाये जा चुके हैं. वहीं कानपुर आईआईटी ने 538 सेंसर अनवरत वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन लगाने का काम पूरा कर लिया है. इस प्रकार सूबे में अब वायु प्रदूषण की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी के लिए 573 स्टेशन हो गए हैं. प्रदूषण के कारण का पता चलने पर उसका समाधान किया जाएगा.
मोतिहारी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से जारी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक देशभर में सबसे प्रदूषित शहर मोतिहारी रहा. मोतिहारी का सूचकांक 256 पहुंचा है. यानी यहां की हवा खराब अवस्था में पहुंच गई है. दूसरे नंबर पर बहादुरगढ़ 243, तीसरे स्थान पर ग्रेटर नोएडा 237, चौथे स्थान पर फरीदाबाद 227, पांचवे स्थान पर सोनीपत है, जिसका सूचकांक 206 है.