
प्रतापगढ़। निकटवर्ती ग्राम उमरड़ा में कृषि विज्ञान केन्द्र प्रतापगढ़ द्वारा सरसों प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. योगेश कनौजिया ने बताया कि केंद्र ने इस वर्ष रबी में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (तिलहन) के तहत 20 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों के 50 प्रदर्शन आयोजित किए। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों के खेतों तक नवीनतम तकनीक पहुंचाकर सरसों का उत्पादन बढ़ाना है।डॉ. कनोजिया ने बताया कि सरसों राजस्थान की प्रमुख तिलहनी फसल है। यह फसल कम लागत एवं कम सिंचाई सुविधा में अन्य फसलों की तुलना में सर्वाधिक लाभ देती है। प्रदर्शन में दी गई सरसों की उन्नत किस्म आरएच-761 का पौधा 165-212 सेमी ऊँचा होता है। इसके दाने चमकदार होते हैं तथा तेल की मात्रा अन्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है। यह किस्म 135-145 दिन में पक जाती है तथा इसकी उत्पादकता 24 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

डॉ. कनौजिया के अनुसार जिप्सम के प्रयोग से न केवल तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ती है बल्कि दानों की चमक और आकर्षण भी बढ़ता है। श्योरामयादव द्वारा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिशन के अंतर्गत रबी फसलों की निगरानी एवं निगरानी हेतु कृषकों से जानकारी ली गई। सहायक निदेशक (कृषि) सम्पतलाल मीना ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी तथा किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कृषि विभाग के अरविन्द कुमार मीना ने किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जुड़कर अधिक लाभ प्राप्त करने को कहा तथा फसल विविधीकरण पर जोर दिया। तकनीकी सहायक डॉ. रमेश कुमार डामोर ने किसानों को अजोला के बारे में बताया कि पशुपालक एवं किसान अजोला से पशुओं में प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं। कर सकना। तकनीकी सहायक अजय कुमारसेन ने किसानों को सही तरीके से गोबर खाद बनाने के बारे में विस्तार से बताया। उमरड़ा गांवों के 89 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।