मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप

विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए ने मणिपुर में जारी हिंसा की चिंताजनक स्थिति से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अवगत कराते हुए राज्य में अविलंब शांति और सद्भाव की बहाली के लिए उनसे तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

साथ ही विपक्ष ने राष्ट्रपति से यह भी अनुरोध किया,
मणिपुर पर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बयान देने और शांति बहाली के लिए पीएम को तत्काल मणिपुर का दौरा करने का निर्देश दें।
मणिपुर हिंसा का जायजा लेकर लौटे आइएनडीआइए के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा गया जिमसें में हिंसा रोकने से लेकर इससे प्रभावित लोगों को सहायता मुहैया कराने के लिए कई आवश्यक कदमों का सुझाव दिया गया है।
विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में आइएनडीएआइए के 31 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसमें मणिपुर का दौरा करने वाले आइएनडीआइए के 21 सांसद भी शामिल थे जिन्होंने राष्ट्रपति को वहां की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया।
खरगे ने क्या कुछ कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष के ज्ञापन में राष्ट्रपति से मणिपुर में शांति एवं सद्भाव स्थापित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर तत्काल संसद को संबोधित करने के लिए दबाव डालने के लिए कहा गया है। ताकि संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत और व्यापक चर्चा हो।
द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद आइएनडीआइए नेताओं के साथ पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा,
हमारी मांगों और ज्ञापन पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वे इसे जरूर देखेंगी। हमने राष्ट्रपति से कहा कि पिछले 92 दिनों की तबाही के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार दोनों को न्याय प्रदान करने के लिए अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए।
अबतक कितने लोगों की हुई मौत?
खरगे ने कहा कि मणिपुर में 5,000 से ज्यादा घर जलाए जा चुके हैं, 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 60 हजार से लोग विस्थापित हो चुके हैं। मणिपुर में लोगों के पास खाने-पीने की वस्तुएं नहीं है। महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है, मगर अभी तक प्रधानमंत्री न मणिपुर गए हैं न ही इस बारे में बोला है। पीएम को मणिपुर जाना चाहिए।
आइएनडीआइए सांसदों के साथ मणिपुर का दौरा करने वाली तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने राष्ट्रपति के समक्ष राज्य की महिलाओं को हिंसा के दौरान हुए ‘गंभीर नुकसान’ का मुद्दा उठाया। महिलाओं को लगे आघात की स्थिति सुधारने में मदद के लिए उन्होंने अलग-अलग समुदायों से दो मणिपुरी महिलाओं को राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामित करने का राष्ट्रपति से आग्रह किया।
विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहा शामिल?
विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में अधीर रंजन चौधरी, तिरुचि शिवा, कनिमोझी, राजीव रंजन सिंह ‘लल्लन’, गौरव गोगोई, सुशील गुप्ता, जयंत सिंह, मनोज झा समेत कई अन्य नेता शामिल थे। नूंह में सांप्रदायिक तनाव का मुद्दा भी उठाया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात में आइएनडीआइए ने मणिपुर के साथ हरियाणा के नूंह में जारी सांप्रदायिक तनाव और हिंसा का मुद्दा भी उठाया। खरगे ने कहा,
हमने राष्ट्रपति से कहा कि हरियाणा में जो दंगे हो रहे हैं वो प्रधानमंत्री के दफ्तर से 100 किमी भी दूर नहीं है, मगर प्रधानमंत्री इसका संज्ञान तक नहीं ले रहे हैं।