उच्च न्यायालय ने अमरावती आर-5 जोन में मकानों के निर्माण पर रोक लगाई

आंध्रप्रदेश: अंतरिम स्थगन आदेश में कहा गया है, ‘‘अगर सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है और बाद में उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है तो यह अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती है। यह जनता का पैसा है।’’ अदालत के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा लाभार्थियों को जारी किए गए आवास पट्टों (दस्तावेजों) में एक खंड था कि ‘‘उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय (शर्त 10) के समक्ष लंबित अंतिम आदेशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी’’, लेकिन वे फिर भी इस दिश में आगे बढ़े और भूखंड दे दिए गए और निर्माण की योजना बनानी शुरू कर दी गई।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अमरावती राजधानी क्षेत्र के आर-5 जोन में गरीब लोगों के लिए मकानों के निर्माण पर रोक लगा दी, जो युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। न्यायमूर्ति डीवीएसएस सोमयाजुलु, न्यायमूर्ति चीकाती मानवेंद्रनाथ रॉय और न्यायमूर्ति रविनाथ तिलहर की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने आदेश दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में इस क्षेत्र में आगे निर्माण उचित या न्यायोचित नहीं होगा। आंध्र प्रदेश सरकार ने गरीबों के लिए आवास भूखंड उपलब्ध कराने और वहां मकान निर्माण को लेकर आर-5 जोन बनाने के उद्देश्य से राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (सीआरडीए) अधिनियम में संशोधन किया था। लेकिन किसानों के एक समूह, नीरुकोंडा और कुरागल्लू किसान कल्याण संघ ने आर-5 जोन निर्माण के खिलाफ याचिका दायर कर दी।
बृहस्पतिवार को जारी स्थगन आदेश में कहा गया, “मामले को ध्यान में रखते हुए अदालत की राय है कि व्यापक जनहित में फिलहाल आर-5 जोन में मकानों का निर्माण ठीक नहीं है।” पीठ ने कहा कि जिन लोगों ने आर-5 जोन में मकानों के निर्माण को चुनौती दी है उनकी लंबित याचिकाओं पर अदालतों और उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के आधार पर आगे कदम उठाए जा सकते हैं। 24 जुलाई को बड़े जोर शोर से मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) – वाईएसआर बीएलसी (यू) योजना के तहत 1,830 करोड़ रुपये की लागत से गुंटूर जिले के कृष्णयापलेम लेआउट में 50,793 घरों की नींव रखी थी। मंगलागिरी और ताड़ीकोंडा विधानसभा क्षेत्रों में स्थित इन घरों का निर्माण सीआरडीए क्षेत्र में 1,400 एकड़ में किया जाना था। उच्च न्यायालय की अंतरिम रोक के साथ ही ये सारी गतिविधि रुक गई हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालतों द्वारा रिट याचिकाओं और विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) पर निर्णय किए बिना आर-5 जोन में भारी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च करने का प्रस्ताव है। अंतरिम स्थगन आदेश में कहा गया है, ‘‘अगर सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है और बाद में उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है तो यह अदालत मूकदर्शक नहीं रह सकती है। यह जनता का पैसा है।’’ अदालत के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा लाभार्थियों को जारी किए गए आवास पट्टों (दस्तावेजों) में एक खंड था कि ‘‘उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय (शर्त 10) के समक्ष लंबित अंतिम आदेशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी’’, लेकिन वे फिर भी इस दिश में आगे बढ़े और भूखंड दे दिए गए और निर्माण की योजना बनानी शुरू कर दी गई।


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