
शिमला। प्रदेश में आर्थिक संकट के बाद भी सरकार ने सीपीएस की नियुक्ति की है जबकि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। पूर्व में भी कांग्रेस सरकार की इस मामले में फजीहत हुई थी। यह बात बुधवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में जारी बयान में कही। उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर इस मामले पर उच्च न्यायालय में सही निर्णय लिया है। भाजपा पहले ही इन नियुक्तियों का विरोध करती आ रही है लेकिन प्रदेश सरकार ने सीपीएस को नियमों के विपरीत जाकर नियुक्त करके उन्हें सुविधाएं दी थीं। जयराम ठाकुर ने कहा कि सभी सीपीएस पिछले एक साल से प्रदेश में कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में आर्थिक संकट होने के बाद भी सरकार ने सीपीएस पर करोड़ों रुपए खर्च किए, जो प्रदेश के विकास कार्य में लगाए जा सकते थे।

हमें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए तत्काल कार्रवाई करेंगे। उधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सतपाल जैन ने कहा कि हमने एक याचिका प्रदेश के उच्च न्यायालय में प्रेषित की है इसको लेकर 13 बार सुनवाई हो चुकी है। हमने अपनी याचिका में कहा है कि सीपीएस के पद का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है और कांस्टिच्यूशन ऑफ इंडिया के आर्टिकल 164 के अंतर्गत प्रदेश में 15 प्रतिशत से ज्यादा मंत्रिमंडल नहीं बनाया जा सकता जो कि हिमाचल में 12 है, पर सीपीएस की घोषणाओं के बाद यह संख्या 17 से 18 पहुंच जाती है। जैन ने कहा कि हमने विमल रॉय असम प्रांत, उसके उपरांत मणिपुर प्रांत और पंजाब प्रांत की जजमैंट भी हाईकोर्ट के सामने प्रस्तुत की है जिसमें सीपीएस के निर्णय के खिलाफ फैसला सुनाया गया है।