शहादत मांगे प्रतिशोध

By: divyahimachal
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग इलाके में, आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान, राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष, राज्य पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट और राइफलमैन रवि कुमार जिस तरह ‘शहीद’ हुए, वह अत्यंत त्रासद और मर्माहत घटना है। ऐसी शहादतों का खालीपन भरना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि एक सैनिक या जवान को प्रशिक्षित करने में अनथक मशक्कत और ढेरों संसाधन लगते हैं। चार परिवारों के आंगन में ‘शहीदों’ के पार्थिव शरीर रखे थे और परिजन न चाहते हुए भी शोक-संतप्त हैं। जिन बच्चों ने कुछ समय पहले ही अपनी आंखें खोली हैं, वे पिता के साये से अनाथ हो चुके हैं। उनकी नियति शायद यही थी! आतंकवाद और ऑपरेशन इन व्यथाओं को महसूस ही नहीं कर सकते। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का सफाया कर दिया गया है, हमारा राजनीतिक नेतृत्व बार-बार यही दावे करता है, लेकिन यह विराट अद्र्धसत्य है। आतंकवादी नई रणनीति, नई साजिश और नई चुनौतियों के साथ अचानक हमले करते हैं।
शहादत पर देश को गर्व हो सकता है, मां भारती सुरक्षित रहती है, लेकिन घरों के चिराग भी बुझते हैं। आतंकवाद को क्या हासिल होता है? क्या इसे ही जेहाद कहते हैं? बेशक कश्मीर में आतंकवाद की बुझती, आखिरी लौ हो सकती है, लेकिन पाकपरस्त लश्कर-ए-तैयबा और उसके छद्म नाम वाले आतंकी गुट ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के दहशतगर्द अपने नापाक मंसूबों में तो कामयाब रहे हैं। बेशक 95 फीसदी आतंकवाद, उनके नेटवर्क, घुसपैठ और पाकिस्तान का छाया-युद्ध समाप्त हो रहा है, लेकिन शेष 5 फीसदी के उन्मूलन में हमें न जाने कितनी शहादतें देनी पड़ेंगी? इस घटना के साथ संघ शासित क्षेत्र के ‘पीर पंजाल’ इलाके पर फोकस हो गया है, क्योंकि वह आतंकी गतिविधियों के नए इलाके के तौर पर उभर रहा है। ‘पीर पंजाल’ में ही जनवरी, 2021 से 30 मई, 2023 के बीच 24 सुरक्षाकर्मी ‘शहीद’ हुए और 75 नागरिक मारे जा चुके हैं। अगस्त माह तक यह आंकड़ा अधिक हो सकता है, क्योंकि कश्मीर में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ें थमी नहीं हैं। कम जरूर हुई हैं। राजौरी जिले के इस इलाके में घने जंगल और कुदरती गुफाएं हैं। वे आतंकियों के लिए ‘पनाहगार’ साबित हो रहे हैं। इस इलाके में सुरक्षा स्थितियां बेहतर मानी जाती थीं, लेकिन 2020 के बाद यह आतंकियों का नया गढ़ बन गया है और आतंकी गतिविधियां लगातार जारी रही हैं। पाकिस्तान की सीमा भी करीब लगती है। घने जंगलों के कारण ऑपरेशन चलाने में दिक्कतें होती हैं। चूंकि आतंकी घात लगाए बैठे रहते हैं, लिहाजा हमारे सैनिक और जवान गोलीबारी के सहज निशाने पर रहते हैं। केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह का मानना है कि पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग कर देना चाहिए। कैसे किया जा सकता है? हमारे क्रिकेट, कूटनीतिक और कुछ कारोबारी संबंध तो हैं।
उन्हें खत्म करेंगे, तो पाकिस्तान अलग-थलग किया जा सकता है। लेकिन फारूक अब्दुल्ला और सैफुद्दीन सोज सरीखे कश्मीरी नेता पुराना राग अलापते रहे हैं कि पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए। संवाद से ही आतंकवाद का सफाया किया जा सकता है, अमन-चैन आ सकता है, लेकिन मुठभेड़ों से आतंकवाद को समाप्त नहीं किया जा सकता। हमारा मानना है कि शहादतों की प्रतिक्रिया में पलटवार किए जाने चाहिए। सेना और सुरक्षा बल प्रतिशोध लें। ऐसा वे कर भी रहे होंगे, क्योंकि हमारे सैनिकों और जवानों के हाथ पूरी तरह स्वतंत्र हैं। बेशक बीते साल में 1.88 करोड़ पर्यटक कश्मीर की सरजमीं पर आए, बेशक जी-20 देशों की बैठक भी वहीं आयोजित की गई, बेशक कश्मीर में ‘तिरंगा’ ऊंची इमारतों पर लहराता है, लेकिन पाकपरस्त आतंकी गुट लगातार रणनीति बदलते रहे हैं, ताकि सुरक्षा-व्यवस्था को चकमा दिया जा सके। वैसे सेना के ही जनरलों का कहना है कि पंजाब और नेपाल के रास्ते भी आतंकी कश्मीर में घुस रहे हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर आतंकी गुटों में भर्तियां, पत्थरबाजी, गिरोह बहुत कम हुए हैं, लेकिन अब भी हैं और उन्हीं से आतंकवाद जिंदा है।
