सीएम आफिस पहुंची शिक्षण संस्थान डिनोटिफाई करने की फाइल, स्कूल बंद करने पर फैसला जल्द
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शिमला
प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान खोले गए और अपग्रेड किए गए स्कूलों को डिनोटिफाई करने की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई है। अब सरकार इसमें तय करेगी कि इन स्कूल और कालजों को बंद किया जाएगा या नहीं। इसके लिए 31 दिसंबर को ही इंतजार किया जा रहा था जब स्कूलों में ई-सवांद कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों का रिजल्ट घोषित होना था। अब ये रिजल्ट जारी हो चुका है और ऐसे में अब सरकार स्कूल और कालेजों को डिनोटिफाई करने का फैसला जल्द ले सकती है। बाकि विभागों को बंद किया जा चुका है, लेकिन शिक्षा विभाग के तहत आने वाले स्कूल और कालेजों पर अभी निर्णय नहीं हुआ था। मुख्यमंत्री के साथ हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के 380 स्कूल और 26 कालेजों को डिनोटिफाई किया गया है। इन्हें बंद करने से पहले सरकार दो पहलुओं को देखेगी।
पहला ये कि इन स्कूलों में स्टूडेंट एनरोलमेंट कितनी है और दूसरा ये कि क्या इन स्कूलों को खोलने से पहले आरटीई यानी राइट टू एजुकेशन अधिनियम की पालना हुई या नहीं। दूसरी ओर कुछ शिक्षक संगठन भी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इन शिक्षकों का ये कहना है कि जहां पर यह स्कूल खोले गए हैं वहां पर बच्चों की एडमिशन पूरी है और उन्होंने अपनी मनपंसद के सब्जेक्ट भी लिए हैं ऐसे में यदि यह स्कूल डिनोटिफाई होते है, तो उसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा।दूसरा मुद्दा ये है कि इन स्कूलों में 100 फीसदी स्टाफ भी उपलब्ध है। छात्रों को नए खोले गए स्कूलों में एडमिशन दी गई है वहां पर छात्रों ने साइंस आट्र्स और कॉमर्स में अपने मनपसंद विषय चुने हैं और उसी में वे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, लेकिन अगर सरकार इन स्कूल और कालेजों को बंद करती है तो यह बच्चे कहां जाएंगे।
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