महिला आरक्षण बिल पर विपक्षी दलों ने दिखाई एकजुटता, मोदी सरकार के खिलाफ बदला सुर

नई दिल्ली | महिला आरक्षण को लेकर राजनैतिक नफा और नुकसान का हिसाब किताब शुरू हो गया है. छह महीने बाद होने वाले आम चुनाव में इसका क्या असर होगा, यह चुनावी नतीजों के बाद ही तस्वीर साफ होगी. लेकिन ये तो तय है कि इसी बहाने INDIA गठबंधन और मजबूत हुआ है. विपक्षी एकता के लिए ये गठबंधन बना है. महिला आरक्षण बिल ने इसके सहयोगी दलों की एकजुटता बढ़ा दी है।
गठबंधन ने अगले चुनाव के लिए OBC पॉलिटिक्स और जातिगत जनगणना का एजेंडा सेट कर दिया है।अब तक ये मुद्दा समाजवादी पार्टी, आरजेडी, जेडीयू और डीएमके जैसा पार्टियों का होता था. पर अब कांग्रेस ने भी इसे अपना राजनैतिक हथियार बना लिया है. देश की सबसे पुरानी पार्टी की ये बदली हुई रणनीति है. किसी ने सोचा था कि कभी कांग्रेस भी OBC राजनीति के रास्ते पर चल सकती है, लेकिन महिला आरक्षण ने कांग्रेस को ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है.कहा तो यह जा रहा था कि इस बिल पर INDIA गठबंधन में फूट पड़ जाएगी. पर संसद में INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों का एक स्टैंड रहा. सोनिया गांधी से लेकर ललन सिंह और मनोज झा एक सुर में बोले. महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता को नई ताकत मिल गई है।
