पुलिस को संवेदनशील बनाने के लिए सरकार गाइडलाइन बनाए हाईकोर्ट

बिहार | सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति को पोस्टमार्टम कराने के बजाये नहर में फेंके जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसे मामले के लिए गाइडलाइन बना लागू करने की बात कही. मुख्य न्यायाधीश
हाजीपुर-मुजफ्फरपुर एनएच के ढोढ़ी पुल के समीप सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति को पुलिस वाले अस्पताल भेजने के बजाये उसे नहर में फेंकने जाने की खबर पर कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया. कोर्ट का कहना था कि ऐसे मामले में खास कर पुलिसकर्मियों को काफी संवेदनशील होना चाहिए. कोर्ट ने राज्य सरकार को गाइड लाइन तैयार करने की बात कही. कोर्ट ने अपने स्तर से भी कुछ गाइडलाइन दिया है. इस केस में केंद्रीय गृह मंत्रालय सहित रेलवे, आरपीएफ के डीजी, राज्य सरकार, गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी बनाया है. एनएच 22 पर हुई सड़क दुर्घटना में एक अज्ञात व्यक्ति की जान चली गई. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को अमानवीय तरीके से पुल के ऊपर रेलिंग से लाठियों के सहारे नहर में फेंक दिया.

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि घटना की जानकारी होने के बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई की है. कोर्ट ने कोविड के दौरान मृत शवों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर जारी गाइडलाइन का हवाला देते हुए सरकार को कार्रवाई करने का आदेश दिया.


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