जेओए 817 पर मुख्य सचिव ने बुलाई बैठक

शिमला। सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद जूनियर ऑफिस अस्सिटेंट पोस्ट कोड 817 को लेकर मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने गुरुवार को बैठक बुलाई है। सुबह चीफ सेक्रेटरी चैंबर में यह बैठक होगी और इसमें विजिलेंस ब्यूरो और विधि विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया है। सुप्रीम कोर्ट से केस क्लीयर होने के बाद विजिलेंस ब्यूरो को सरकार पूछेगी कि इस मामले में दर्ज फिर का स्टेटस क्या है और पेपर लीक की गहराई कितनी है? इस बैठक में लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग हमीरपुर के एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी को भी आने को कहा गया है। सभी पक्षों की मौजूदगी में ऐसी उम्मीद है कि इस भर्ती के भविष्य पर फैसला हो पाएगा। 1800 से ज्यादा भर्तियों इस भर्ती परीक्षा के माध्यम से रोजगार मिलना है, जो पिछले चार साल से ज्यादा समय से इंतजार कर रहे है। मुख्य सचिव इस बैठक में इस संभावना पर भी विचार करेंगे कि क्या कंडीशनल रिजल्ट घोषित करना संभव है या नहीं? इससे पहले कार्मिक विभाग को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की आधिकारिक प्रति मिल गई थी और इस फाइल पर अभी यहां बैठक तय हुई है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर को हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले मामले में जेओए पोस्ट कोड 817 के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी थी। अंकिता ठाकुर एंड अदर्स बनाम हिमाचल प्रदेश स्टाफ सिलेक्शन कमिशन के इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा दी गई रिलेक्सेशन को कानूनी तौर पर अस्थिर बताते हुए उसे रद्द कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि जेओए पोस्ट कोड 556 के लिए दूसरे भर्ती विज्ञापन के आधार पर बनाई गई मैरिट लिस्ट को री ड्रॉ नहीं किया जाएगा और उसमें उन अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जो रिलेक्सेशन ऑर्डर के आधार पर एलिजिबल हुए थे। उच्चतम न्यायालय ने पोस्ट कोड 817 के लिए 21 सितंबर, 2020 को जारी तीसरे विज्ञापन के आधार पर विज्ञापित सीटों को सैगरीगेट करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पहले विज्ञापन के आधार पर होने वाली नियुक्तियों को डिस्टर्ब नहीं किया जाएगा, सिर्फ इसलिए कि कुछ अभ्यर्थियों ने रिलैक्सेशन ऑर्डर के आधार पर पात्रता प्राप्त कर ली है।