थाने में समस्या लेकर आए पीड़ित से उठवाया गोबर, पुलिस आयुक्त ने लिया ये फैसला

दलित के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया.

आगरा। एसओ जगनेर और थाने में तैनात छह पुलिसकर्मी आरोपों के कठघरे में है। आरोप गंभीर हैं। एक पीड़ित बुधवार को पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश हुआ। बताया कि समस्या लेकर थाने गया था। पहले थाने में कई दिन मजदूरों की तरह काम कराया। उसके बाद थाना प्रभारी ने अपने गांव भेज दिया। एक महीना दो दिन वहां कैद में रहा। उससे गोबर उठवाया गया। मजदूरी कराई गई। बमुश्किल कैद से मुक्त हुआ है। पुलिस आयुक्त ने एसीपी खेरागढ़ को जांच के आदेश दिए हैं।
पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में थाना प्रभारी के अलावा संचित मुंशी, सुशील बैसला, अंकित, अक्षय, जगवीर, सनी को आरोपित किया है। पीड़ित का कहना है कि जांच कराई जाए। एक ही थाने में तैनात ये पुलिस कर्मी आपस में रिश्तेदार हैं। एक ही बिरादरी के हैं। वह दलित है। दलित के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया है।
अजीजपुर, नई आबादी, धनौली (मलपुरा) निवासी शैलेंद उर्फ रिंकू ने शिकायत की है। उसने पुलिस आयुक्त को बताया कि वह 19 जुलाई 2023 को उनके समक्ष पेश हुआ था। उसकी पत्नी घर का सामान लेकर चली गई थी। उन्होंने थाना मलपुरा फोन करके उसकी मदद के आदेश दिए थे। वह मलपुरा थाने पहुंचा। थाना प्रभारी ने बात सुनी। उसकी पत्नी ने जगनेर में किराए पर मकान लिया था। वहां सामान बंद करके अपने मित्र के साथ चली गई थी।
इस जानकारी पर एसओ मलपुरा ने जगनेर थाना प्रभारी को फोन किया। बताया कि पुलिस कमिश्नर साहब का फोन आया था। पीड़ित की मदद करनी है। 20 जुलाई को वह थाना जगनेर पहुंचा। एसओ जगनेर अवनीत मान ने उसकी बात सुनी। उससे कहा कि मदद करेंगे। उसे थाना परिसर में ही एक कमरा दे दिया। कहा थाने में रहे।
पीड़ित का आरोप है कि थाने में पुलिसकर्मी उससे काम कराने लगे। कोई पकड़े धुलवाता तो कोई झूठे बर्तन साफ कराता। 18 अगस्त तक उसने थाने में मजदूरी की। उसके बाद थाना प्रभारी ने उससे कहा कि गांव में उनका मकान बन रहा है। वहां देखरेख के लिए जाना है। वापस लौटकर आएगा तो सामान वापस दिला देंगे। थाने में तैनात मुंशी अक्षय उसे लेकर आईएसबीटी आया। एक बस में बैठाया। परिचालक पुलिस का परिचित था। परिचालक ने उसे बढ़ौत (बागपत) छोड़ा।
वहां थाना प्रभारी के पिता मिले। अपने गांव सिनौली (बढ़ौत) ले गए। वहां उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार हुआ। गोबर उठवाया गया। घर वापस करने की जिद करने पर उसे पीटा गया। एक महीना दो दिन वह कैद में रहा। घर में दिक्कत है यह बहाना बनाने पर थाना प्रभारी ने थाने से अक्षय मुंशी को भेजा। अक्षय मुंशी बढ़ौत से उसे लेकर आया। सीधे थाने पहुंचा।
थाने में थाना प्रभारी ने उसे धमकाया। जेल भेजने की धमकी दी। सामान वापस नहीं दिलाया। दोबारा थाने में रख लिया। मजदूरों की तरह काम कराया। 15 अक्तूबर को वह थाना पुलिस की कैद से छूटा है। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने एसीपी खेरागढ़ को जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित ने बताया कि पत्नी ने कलाकर नाम के व्यक्ति के घर में किराए पर कमरा लिया था। पुलिस ने उसका सामान कलाकर के घर से निकलवा दिया था। उसके परिचित मुकेश की सुपुर्दगी में दे दिया। मुकेश से बोल दिया कि जब तक उससे नहीं कहीं इसे सामान नहीं देना। मुकेश पुलिस से भयभीत है। सामान नहीं देता।