मणिपुर हिंसा के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक्शन, 9 मैतेई उग्रवादी संगठनों पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को कई मेइती उग्रवादी संगठनों पर उनकी हिंसक गतिविधियों के चलते बैन लगा दिया। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, इन मेइती उग्रवादी संगठनों पर उनकी अलगाववादी, विध्वंसक, आतंकवादी और हिंसक गतिविधियों को लेकर अंकुश लगाया गया है। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत इन्हें ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित कर दिया गया। सरकार का मानना है कि ये संगठन मणिपुर में सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिकों पर हमलों व हत्याओं में शामिल हैं। साथ ही ये देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा हैं।

गृह मंत्रालय की ओर से जिन मेइती संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया गया है, वे इस प्रकार से हैं- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और इसकी राजनीतिक शाखा रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) और इसकी सशस्त्र शाखा मणिपुर पीपुल्स आर्मी (MPA), पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (PREPAK) और इसकी सशस्त्र शाखा रेड आर्मी, कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (KCP) और इसकी सशस्त्र शाखा ‘रेड आर्मी’, कांगलेई याओल कनबा लुप (KYKL), समन्वय समिति और एलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलेइपक (ASUK) और उनके सभी गुट विंग और फ्रंट। ये प्रतिबंध सोमवार से अगले 5 साल तक लागू रहेंगे।
होम मिनिस्ट्री के मुताबिक, इन संगठनों का घोषित टारगेट सशस्त्र संघर्ष से मणिपुर को भारत से अलग करके स्वतंत्र राष्ट्र बनाना रहा है। इसे लेकर ये राज्य के स्थानीय लोगों को अलगाववाद के लिए उकसाते रहे हैं। नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘केंद्र सरकार की राय है कि मेइती चरमपंथी संगठन भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल हैं। वे अपना मकसद हासिल करने के लिए सशस्त्र साधनों को जुटाते हैं। ये संगठन मणिपुर में सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिकों पर हमले करते हैं और उसकी हत्याओं को अंजाम देते हैं। संगठनों के लिए धन इकट्ठा करने की खातिर आम नागरिकों को डराने-धमकाने, जबरन वसूली और लूटपाट के कृत्यों में शामिल रहे हैं। जनता की राय को प्रभावित करने और उनकी सुरक्षा के नाम पर विदेशी स्रोतों से संपर्क बनाना भी इनका काम है। हथियारों, गोला-बारूद की गुप्त खरीद और ट्रेनिंग के लिए इन्होंने पड़ोसी देशों में शिविर भी बनाए हैं।’
गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से सितंबर में कुछ दिनों को छोड़कर मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा हुआ है। राज्य में मेइती समुदाय की ओर से अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग का विरोध हुआ था। इसे लेकर पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद जातीय हिंसा भड़क गई, जिसमें अब तक 180 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मणिपुर की आबादी में मेइती समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।