अक्षय नवमी में क्यों किया जाता है आंवले के पेड़ की पूजा, जाने महत्व

शास्त्रों में लिखी कहानी के अनुसार मां लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ की पूजा करके भगवान विष्णु और शिव को प्रसन्न किया है जिससे उन्होने मां लक्ष्मी को दर्शन दिए. कहते हैं तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है और इसी तरह बेल भगवान शिव के प्रिय हैं. इन दोनों की शक्ति के बराबर आंवले की शक्ति है. ऐसे में आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है.

कैसे करते हैं आंवले के वृक्ष की पूजा
आंवले के वृक्ष की पूजा से पहले स्नान करें और शुद्ध होकर आनंदमय हों.
आंवले के वृक्ष के समीप अगर कोई पूजा का स्थान है तो उसे सुंदर अलंकारित करें.
आप फूल, दीपक, धूप, चादर, और पुष्प आदि का उपयोग कर सकते हैं.
पूजा के लिए आंवले के फल, लौंग, इलायची, रोली, अक्षत, नरियल, और गंध आदि का उपयोग करें.
अब धूप, दीप, अगरबत्ती, और फूलों से समर्पित करें.
विधि के अनुसार मंत्रों का उच्चारण करें और मन से भगवान को स्तुति दें.
पूजा के बाद आंवले के वृक्ष को प्रणाम करें और अपनी मनोकामनाएं मांगें. आप और आपके परिवार के सुख-शांति की कामना करें