
धर्मशाला। पर्यटन-खेल नगरी धर्मशाला के समीप टंग नरवाणा में पिछले सात सालों से सात करोड़ के बजट से बन रहे ट्यूटिल गार्डन को अब धौलाधार बॉयो-डायवर्सिटी पार्क बना दिया है। लेकिन पार्क सात वर्षों से भी अधिक समय बीत जाने के बाद अभी भी बिना बजट के अधर में लटका हुआ है। इस पार्क के दो कम्पोनेंट थे, एक बिल्ट अप एरिया और दूसरा ग्रीन जोन। एशियन डिवेलपमेंट बैंक के माध्यम से सात करोड़ के करीब बजट से बिल्ट अप एरिया का कार्य किया जा चुका है, जबकि ग्रीन जोन का कार्य बजट न होने के चलते लटक गया है। प्रदेश सरकार ने जिला कांगड़ा को टूरिज्म कैपिटल बनाने की घोषणा की है, ऐसे में इस साइट के संचालन की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचटीडीसी) को सौंपी गई है। पार्क में फूलों के स्थानों पर झाडिय़ों का ही राज देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार, प्रशासन व पर्यटन विभाग की बड़ी लापरवाही से पिछले सात वर्ष में देश का दूसरा व पहाड़ी राज्य हिमाचल का पहला ट्यूलिप गार्डन अब धौलाधार बॉयो डायवर्सिटी पार्क बन गया है, जबकि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पहले ट्यूलिप गार्डन के बाद उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और हिमाचल के ही पालमपुर में ट्यूलिप गार्डन तैयार भी कर दिया गया।

एशियन डिवेलपमेंट बैंक की ओर से फंडिड प्रोजेक्ट कंजरविंग प्रोमिनेट टैंपल प्रिसिंक्स एंड अपग्रेडिंग अर्बन इन्फास्ट्रक्चर फॉर टूरिज्म ईन धर्मशाला एंड मकलोडगंज के तहत सात करोड़ में ट्यूलिप का एक भी पौधा नहीं लग पाया है। प्रोजेक्ट के तहत जो अन्य फूल उगाए वह भी उजड़ गए है। ट्यूलिप गार्डन का निर्माण कार्य दस सितंबर, 2016 को शुरू करवाया था। जबकि 31 अगस्त, 2020 को इसे धौलाधार बॉयो डाइवर्सिटी पार्क बनाकर कार्य पूरा भी कर दिया था। बॉयो-डाइवर्सिटी पार्क में ट्यूलिप तो नहीं लग पाए, लेकिन तीन वर्ष पूर्व पूरे हो चुके पार्क के कार्य में एमफी थिएटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, हट ऐरिया, कैफेटेरिया, साइकिलिंग ट्रैक, गार्डन, चिल्ड्रन पार्क और छोटे-छोटे पाउंड बनाए गए है, लेकिन जिस मकसद के साथ हिमाचल में अपनी तरह के इस पहले और अनोखे पार्क को बनाने की शुरुआत की गई थी, वह अधर में ही लटकती नजर आ रही है। वन मंडल धर्मशाला के डीएफओ दिनेश शर्मा ने बताया कि टंग नरवाणा में बॉयो डायवर्सिटी पार्क के दो कम्पोनेंट में से बिल्ट अप एरिया एडीबी के माध्यम से बनकर तैयार हो चुका है, दूसरा इसमें ग्रीन जोन प्रस्तावित था, जिसके लिए बजट प्रावधान होने के बाद काम किए जाएंगे। सरकार के निर्देशानुसार जल्द ही इस साइट को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचटीडीसी) के माध्यम से संचालित किया जाएग। ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत लोगों के लिए सारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।