
कांग्रेस ने एक और यात्रा निकालने की घोषणा की है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ही यात्रा का नेतृत्व करेंगे। इस बार यात्रा की शुरुआत पूर्वोत्तर में मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 14 जनवरी को होगी और 20 मार्च को समापन मुंबई में होगा। करीब 6200 किलोमीटर की यात्रा बस के जरिए की जाएगी, हालांकि बीच-बीच में पदयात्रा और नुक्कड़ बैठकें भी की जाएंगी। यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी। रास्ते में 355 लोकसभा सीटों के क्षेत्र आएंगे, जिनमें से 14 सीटें ही कांग्रेस 2019 के आम चुनाव में जीत पाई थी। उस दृष्टि से यह कांग्रेस की चुनाव प्रचार यात्रा ही है, लेकिन यात्रा के दौरान जो राज्य आएंगे, उनमें से गुजरात, राजस्थान, मणिपुर, नगालैंड राज्यों में कांग्रेस के हिस्से ‘शून्य’ लोकसभा सीट रही थी। एकमात्र असम राज्य में कांग्रेस ने 3 लोकसभा सीटें जीती थीं। उसके अलावा, राज्यों में एक या दो सीट ही नसीब हुई थी। इसे ‘भारत न्याय यात्रा’ नाम दिया गया है, जो 67 दिन तक जारी रहेगी। इससे पहले कन्याकुमारी से कश्मीर तक की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ 136 दिन की थी। मौजूदा यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड राज्य पड़ेंगे, जहां विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की सरकारें हैं। उप्र और महाराष्ट्र में भी विपक्षी गठबंधन एक मजबूत राजनीतिक ताकत है। यात्रा मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान सरीखे राज्यों से भी गुजरेगी, जहां हालिया चुनावों में कांग्रेस भाजपा के मुकाबले बुरी तरह पराजित हुई है। इन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस की सीधी चुनावी टक्कर होती है। बहरहाल अब सवाल यह है कि ‘न्याय यात्रा’ से पहले गठबंधन के घटक दलों को विश्वास में लिया गया था अथवा नहीं? या इस यात्रा के जरिए घटक दलों को, उन्हीं के प्रभाव क्षेत्रों में, चुनौती दी जाएगी, ताकि गठबंधन कांग्रेस की छतरी तले ही आकार ग्रहण करे? सवाल यह भी है कि यात्रा के दौरान जो जनता कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संपर्क में आएगी, उसे सामाजिक-आर्थिक न्याय किस तरह मुहैया कराया जाएगा? खासकर महिलाओं, युवाओं और वंचित तबकों के लिए कांग्रेस की क्या नीतियां होंगी? क्या 6000 रुपए माहवार की ‘न्याय योजना’ को लागू करने का चुनावी वायदा किया जाएगा? राहुल गांधी ने 2019 के आम चुनाव में भी इस योजना का खूब प्रचार किया था, लेकिन देश की जनता ने, सिर्फ किसानों के लिए, 6000 रुपए सालाना की सम्मान राशि के प्रति अपना भरोसा जताया था। ‘मुफ्तखोरी’ की राजनीति पर अब देश को बार-बार मंथन करना चाहिए, क्योंकि देश पर करीब 209 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भी इस बढ़ते कर्ज पर भारत सरकार को सचेत कर रहा है। हालांकि वह हमारी आर्थिक विकास दर को लेकर भी आश्वस्त है। जब तक राहुल गांधी की ‘न्याय यात्रा’ का समापन होगा, तब तक चुनाव आयोग आम चुनाव की तारीखें घोषित कर चुका होगा। 2019 में भी मार्च माह में आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया गया था। कांग्रेस के पक्षधर मान रहे हैं कि जो जनता आज ‘न्याय’ के लिए भटक रही है, उसके लिए लड़ाई लडऩे की यह यात्रा है, लेकिन क्या यह प्रधानमंत्री की ‘गारंटी यात्रा’ के मुकाबले शुरू की जा रही है अथवा कांग्रेस एक निश्चित वोट बैंक बनाने में सफल होगी, ऐसे सवालों के सटीक जवाब कांग्रेस ने नहीं दिए हैं। यह यात्रा करीब 98.75 करोड़ आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरेगी। क्या राहुल गांधी कांग्रेस के लिए वोटों की संख्या में बढ़ोतरी कर पाएंगे? कांग्रेस की यात्रा भी जारी रहेगी और राहुल गांधी पार्टी के पक्ष में वोट भी मांगेंगे, लिहाजा जनसंपर्क के ऐसे अभियान सकारात्मक और प्रशंसनीय ही होते हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के प्रभाव ही कांग्रेस मानती है कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में उसकी सरकारें बनीं, जबकि ऐसे आकलन नहीं किए गए थे, लिहाजा कांग्रेस आशान्वित है कि ‘न्याय यात्रा’ के भी व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। मणिपुर के दंगे भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं।
By: divyahimachal