हम सब युद्ध के खिलाफ शांति के पक्षधर हैं

लखनऊ। उप्र के नागरिक फिलीस्तीनी जनता के खिलाफ इजरायल द्वारा की जा रही बमबारी की सख्त निंदा करते हैं। साथ ही हम किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधि की भी सख्त निन्दा करते हैं किन्तु “हमास” जैसे कट्टरपंथी संगठन किसकी शह पर पैदा होते हैं, इस पर विचार करने की जरूरत है। इतिहास गवाह है कि फिलीस्तीन की जमीन पर इजरायल ने अवैध कब्जा कर वहां की जनता को गजा़ पट्टी पर रहने को मजबूर किया। गाज़ा पट्टी पर रहने वाले 23 लाख लोगों के बुनियादी अधिकार छीन लिए गये। 1948 से गाज़ा पट्टी को एक यातना शिविर में बदल दिया गया और अपने ही देश में फिलीस्तीनी गुलाम हो गये। इजराइल ने फिलीस्तीन की ज़मीनी और समुद्री सीमाओं की नाकेबंदी कर रखी है। इस हमले में हजारों महिलाएं, बच्चे , व लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अपील करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में इजरायल द्वारा किए जा रहे इस हमले के कारण निर्दोष नागरिकों की हत्या को युद्ध अपराध घोषित किया जाये। गाज़ा के अस्पताल में राकेट से हमले की वजह से 471 निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई जिसमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं, यह मानवता के खिलाफ एक बर्बर अपराध है। पश्चिमी देशों अमेरिका, इंग्लैंड ने जिस प्रकार इजरायली राष्ट्रपति नेत्यानाहू से हाथ मिलाया है उसने दुनिया के सभी शांतिप्रिय लोगों को आक्रोशित किया है और आज दुनिया के हर हिस्से में इजरायल के हमले के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।
हमारे देश भारत ने हमेशा ही फिलीस्तीन पर इजरायल के कब्जे की निंदा की है और इजरायल के फिलीस्तीन पर अवैध कब्जे का विरोध किया है। भारत की दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा इजरायल के समर्थन में प्रचार किया जा रहा है जो सर्वथा हमारे देश की नीतियों के विरुद्ध है। हम भारत सरकार से फिलीस्तीन को हर प्रकार की सहायता भेजने की अपील करते हैं। हम महात्मा गांधी के इस कथन पर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हैं कि “फिलीस्तीन अरबों का है जिस प्रकार इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसिसियों का है।” हम नागरिक 75 सालों से फिलीस्तीनी जनता की अमानवीय तकलीफों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव द्वारा निर्धारित सीमाओं में फिलीस्तीन को बसाया जाये और उस पर से इजरायल के अवैध कब्जे को हटाया जाये। फिलीस्तीनी जनता को उनका स्वतंत्र देश व उनके अधिकारों की बहाली की जाये जिससे वे शांतिपूर्ण व सम्मानजनक जिंदगी जी सकें।