

यह एक मंदिर होना चाहिए
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर और देवस्थान बनाना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, अगर पूजा के दौरान व्यक्ति का चेहरा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर हो तो यह शुभ माना जाता है।
सेवा कब होनी चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार पूजा सूर्योदय के ठीक बाद और सूर्यास्त से पहले करनी चाहिए क्योंकि समय के साथ दैवीय शक्ति भी बदलती रहती है। इसके अलावा ब्रह्मा मुश्रता की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक मुख्य रूप से पूजा के दौरान जलाए जाते हैं क्योंकि इन्हें शुभ प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाने से नकारात्मकता दूर होती है और आसपास का वातावरण स्वच्छ रहता है।
ठीक है, आरती
आरती करने की सही विधि शास्त्रों में बताई गई है। आरती बजाते समय आपको एक जगह खड़े होकर उस स्थान पर थोड़ा झुकना चाहिए। आरती करते समय भगवान को चार बार पैरों में, दो बार नाभि में, एक बार मुंह में और सात बार शरीर के सभी अंगों में घुमाएं।