
राजसमंद। आम तौर पर देवी-देवताओं या किसी की स्मृति में कुछ समर्पित किया जाता है, लेकिन कालीवास के ग्रामीणों ने एक नई शुरुआत करते हुए विद्यालय में भोजन कक्ष का निर्माण करवाते हुए उसका नामकरण गांव की ही एक शख्सियत के नाम पर कर दिया है। नवीन परिसर में स्थानांतरित राउमावि भवन में भोजन घर की कमी पर संस्था प्रधान के प्रयासों से गांव के लोगों से चंदा एकत्रित कर एवं विद्यालय विकास कोष से राशि जुटाकर भोजन कक्ष मय रसोई का निर्माण कराया गया। संस्था प्रधान लीला कुंवर की पहल पर गांव वासियों ने भोजन कक्ष को गांव के गौरव समझे जाने वाले स्वतंत्रता सैनानी व चार दशक तक देलवाड़ा और कालीवास दोनों पंचायतों के निर्विरोध सरंपच रहे 105 वर्षीय नाहरसिंह झाला के नाम पर करने का निर्णय करते हुए गणतंत्र दिवस समारोह में भामाशाह प्रेरक लक्ष्मणसिंह चुण्डावत के हाथों इसका लोकार्पण कराया।

इस दौरान सरपंच वगतराम गमेती, रतनसिंह राणावत, गमेरसिंह सिसोदिया, बलवंतसिंह झाला, कल्याणसिंह चुण्डावत, करणसिंह झाला, ललितसिंह चुण्डावत, त्रिलोकसिंह झाला, नारायणलाल तेली, गोविंदसिंह झाला, किशनलाल, भूपेन्द्र श्रीमाली, राजनसिंह, जगदीश जाट, नरेंद्रसिंह झाला, प्रहलादसिंह झाला, कुबेरसिंह राठौड़, सुनिता गहलोत, ललिता कलाल, निर्मला चुण्डावत, महिपाल सिंह राणावत मौजूद थे। इस दौरान विद्यालय में वार्षिकोत्सव का भी आयोजन किया गया। समारोह में अतिथियों ने बताया कि शतायु पार झाला चार दशक तक दो-दो पंचायतों में सरपंच रहने के बावजूद खपरैल नुमा झौपड़ी में रहते हैं। आजादी के सैनानी होने और जनसंघ के सदस्य होने पर स्वतंत्रता सैनानी के रूप में पेंशन लेने के लिए एक पार्टी का दामन थामने का उन्हें प्रस्ताव मिला पर उसे भी उन्होंने ठुकराते हुए अभावों में जीना मंजूर किया।