
भरतपुर: पर्यटन का पीक सीजन प्रारंभ हा़े गया है, लेकिन हाेटलाें और केवलादेव घना में खास चहल-पहल नहीं है। गेट पर ई रिक्शों की लंबी लाइन ट्यूरिस्ट का इंतजार में है। गाइडों का एक समूह भी पर्यटकों का बेताबी से बाट जाेह रहा है। किंतु इक्का-दुक्का ट्यूरिस्ट ही आ रहा है।

सैलानियों की इस कमी का एक प्रमुख कारण नई व्यवस्था काे माना जा रहा है । जिसके तहत अब दाे या दाे से अधिक ट्यूरिस्ट काे गाइड लेना अनिवार्य हाेगा। उसका टैरिफ है मिनिमम 800 रुपए दाे घंटे के। उसके बाद 400 रुपए घंटा और उससे आगे 300 रुपए प्रतिघंटे। यही रेट ई -रिक्शा की है।
यानी अगर आप मिनिमम दाे घंटे के लिए पार्क में जा रहे हैं ताे आपकाे कम से कम 1600 रुपए खर्च करने हाेंगे। इसमें 136 रुपए घना की प्रति व्यक्ति टिकट अलग से है। अगर चार से अधिक समूह है ताे आपकाे दाे ई-रिक्शा और दाे गाइड लेना हाेगा। यानी दाे गुना खर्च। ऐसे में बहुत सा ट्यूरिस्ट बिना भ्रमण के ही लाैट रहा है।
