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जो पहले से हैं परेशान, उनको ही शातिर साइबर ठग ने बनाया निशाना

नई दिल्ली: देश में साइबर क्राइम की वारदात बढ़ती जा रही हैं। अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है जहां पैरेंट्स की मजबूरी का फायदा उठाकर बीसीए ग्रेजुएट पैसा ऐंठ रहा था। इसके लिए उसने पुलिस के ही डाटा का इस्तेमाल किया। 28 साल के ठग के तरीके से पुलिस सकते में है। यह अपराधी उन परिवारों को अपना शिकार बना रहा था जिनके बच्चे लापता हैं। दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधी को उत्तर प्रदेश के मऊ से गिरफ्तार कर लिया है।

उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले मार्कंडेय की 14 साल की बच्ची लापता हो गई थी। पुलिस को इसकी सूचना देने के कुछ घंटों बाद ही उन्हें एक अंजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने उसे लड़की की बेसिक जानकारी देते हुए कहा, ‘मैं थाने से बोल रहा हूं। हमने आपकी बेटी को चंडीगढ़ के पास ढूंढ लिया है और उसे बरामद करने के लिए हम वहां जा रहे हैं। कृपया 8,000 रुपये ट्रांसफर कर दें ताकि हम पेट्रोल डलवा सकें।’ बेटी के लिए परेशान मार्कंडेय ने फोन करने वाले को पैसे ट्रांसफर कर दिए। फिर कॉल आना बंद हो गया।

बुधवार को, दिल्ली पुलिस ने बताया कि मार्कंडेय सहित कम से कम 904 माता-पिता, जो अपने लापता बच्चों के बारे में जानकारी के लिए बेताब थे, को एक व्यक्ति ने धोखा दिया। ठग ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया। मार्कंडेय की बेटी बाद में कानपुर में मिली और उसे उसके अपने माता-पिता को सौंप दिया गया। उत्तरी दिल्ली पुलिस ने 28 साल के बीसीए स्नातक श्यामसुंदर चौहान को इस हफ्ते यूपी के मऊ से गिरफ्तार किया। उसने जिपनेट से लापता व्यक्तियों, ज्यादातर बच्चों के बारे में जानकारी डाउनलोड की थी। यह विशेष रूप से अंतर-राज्य पुलिस समन्वय के लिए बनाया गया एक डेटाबेस है। जिपनेट में लापता व्यक्तियों, चोरी हुए वाहनों और फोन को लेकर जानकारी होती है। आरोपी ने इसका इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए किया।

ऑनलाइन डेटाबेस में बच्चों सहित लापता व्यक्तियों की तस्वीरें, उनके पते और शिकायतकर्ता का फोन नंबर होता है। 2004 में बनाए गए जिपनेट का उपयोग दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ पुलिस के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए किया जाता है। चौहान की कार्यप्रणाली पर डीसीपी (उत्तरी दिल्ली) मनोज कुमार मीणा ने कहा, ‘शिकायतें प्राप्त होने के तुरंत बाद लापता व्यक्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। जल्द ही, परिवारों को उस आदमी का फोन आता था जो कभी मुखबिर तो कभी पुलिस अधिकारी होने का नाटक करता था। वह कहता था कि वह लापता व्यक्ति का स्थान जानता है, या वह व्यक्ति दयनीय स्थिति में मिला है।’

डीसीपी मीणा ने कहा, इसके बाद वह पैसे की मांग करता था, अक्सर भावनाओं से खेलता था और झूठे वादे करता था कि वह लापता व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। फिर वह पैसे ट्रांसफर करने के लिए एक क्यूआर कोड साझा करता था। अपने प्रियजनों की कुशलता के लिए परेशान परिवार उसके जाल में फंस जाते थे और उसे 2,000 से लेकर 40,000 रुपये तक की राशि भेज देते थे। कई मामलों में, आरोपी ने दावा किया कि शिकायतकर्ता का बच्चा उसके सामने है, जिसके पास बुनियादी जरूरतें तक नहीं हैं।’

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चौहान की कोई सोशल मीडिया उपस्थिति नहीं है और वह अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पर डिस्प्ले पिक्चर के रूप में एक पुलिस अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल करता था। पुलिस द्वारा चौहान को गिरफ्तार करने के बाद ही उन्हें उसके द्वारा चलाए जा रहे रैकेट का पता चला। उन्होंने पेटीएम पर उसके लेन-देन की डिटेल्स को मैप किया और उन शिकायतकर्ताओं के नंबरों के साथ क्रॉस-रेफरेंस किया, जिनका विवरण जिपनेट (ZIPNET) पर उपलब्ध था। पुलिस का दावा है कि अब तक 904 ऐसे मामले मिले हैं, जहां शिकायतकर्ताओं ने उसे पैसे दिए। वे और अधिक संभावित मामलों की जांच कर रहे हैं।

डीसीपी मीणा ने कहा, ‘चौहान ने अपने लिए ऐसी कॉल करके एक दिन में लगभग 15,000 रुपये कमाने का लक्ष्य रखा हुआ है।’ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उसने इस तरह से जो पैसा वसूला वह कई लाख में है। उत्तरी दिल्ली जिला पुलिस को अब तक अपने अधिकार क्षेत्र में 41 लापता व्यक्तियों की शिकायतों में चौहान की संलिप्तता का पता चला है।

 


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