
देहरादून: उत्तराखंड में बाहर से आकर आवासीय जमीन खरीदने वालों का भी पूर्व सत्यापन होगा. बाहर से आकर जमीन खरीदने वालों की आपराधिक पृष्ठभूमि की भी पड़ताल होगी. सरकार इस प्री वेरिफिकेशन की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने जा रही है.
राज्य में अभी दूसरे प्रदेशों के लोग नगर निगम सीमा से बाहर 250 वर्ग मीटर सीमा तक ही जमीन खरीद सकते हैं. एनडी तिवारी सरकार में ये सीमा 500 वर्ग मीटर थी, जिसे बाद में बीसी खंडूडी सरकार ने घटा कर 250 वर्ग मीटर कर दिया था. अब सरकार इस 250 वर्ग मीटर सीमा तक जमीन खरीदने वालों का भी प्री वेरिफिकेशन कराएगी. जमीन खरीदने वाले से जमीन खरीदने का कारण पूछा जाएगा. जमीन खरीदने वाले की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच पड़ताल कराई जाएगी.

ये फैसला हरिद्वार बुग्गावाला, मोहंड, बिहारीगढ़ के आस पास के उत्तराखंड से सटे क्षेत्रों और यूएसनगर में यूपी से सटी उत्तराखंड की जमीनों पर तेजी से कृषि भूमि पर हो रही अवैध प्लाटिंग में निवेश करने वाले उत्तराखंड से बाहर के लोगों पर नकेल कसने के लिहाज से भी उठाया जा रहा है. हरिद्वार बुग्गावाला क्षेत्र में प्रापर्टी डीलरों, बिल्डरों ने खुद ही कृषि भूमि पर 30 से 40 फीट सड़कें बना दी हैं. खुल कर इन कृषि भूमि पर हो रही अवैध प्लाटिंग का सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रचार हो रहा है. इन क्षेत्रों में निवेश करने वाले अधिकतर लोग राज्य से बाहर के हैं.
प्रदेश में कृषि भूमि खरीद कर होती रही प्लॉटिंग
उत्तराखंड में कृषि कार्यों के नाम पर जमीन खरीद कर बड़े पैमाने पर प्लाटिंग होती रही. देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर और नैनीताल जिले में ऐसे काफी खेल हुए. इसके साथ ही पहाड़ी जिलों में कृषि जमीन खरीद कर बाहरी लोगों ने अपने लैंड बैंक तैयार किए. इसकी समय समय पर शिकायतें भी होती रहीं.
न सिर्फ पहाड़, बल्कि हरिद्वार बुग्गावाला क्षेत्र समेत दिल्ली, देहरादून हाइवे के आस पास की जमीनों की खरीद में पिछले कुछ सालों में अप्रत्याशित तेजी आई है. यहां चारों ओर फैली कृषि भूमि की खरीद पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ी है. बाहरी लोगों के इसी बढ़ते दखल को रोकने की दिशा में सरकार ने बेहद अहम कदम उठाया है. इसके कारण भू कानून आने तक राज्य की कृषि जमीनों की खरीद फरोख्त पर रोक लग सकेगी.