
नई दिल्ली। बीजेपी के खिलाफ एकजुट हुए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सामने सीट शेयरिंग को लेकर सवाल बरकरार है. बैठकें भी हो रही हैं लेकिन जनवरी का एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी सीटों के बंटवारों को लेकर फॉर्मूला तय नहीं हो सका. पिछले साल 19 दिसंबर को इंडिया गठबंधन की दिल्ली में हुई बैठक में ज्यादातर दलों ने कहा था कि हमें जल्द से जल्द सीट बंटवारे को अंतिम रूप देना चाहिए. इस बीच वरिष्ठ नेताओं ने गठबंधन को सीट शेयरिंग में देरी को लेकर नसीहत दी है. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सीट बंटवारे पर जल्द सहमति नहीं बनी तो इंडिया गठबंधन के लिए खतरा है. कुछ सदस्य एक अलग समूह बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप नहीं दिया गया तो गठबंधन के लिए खतरा है. इसे समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए. यह संभव है कि कुछ दल अलग गठबंधन बनाने के लिए एक साथ आ सकते हैं, जो मुझे सबसे बड़ा खतरा लगता है. अभी भी समय है.’’ उन्होंने आगे कहा कि पार्टियों को केवल वही सीटें मांगनी चाहिए जहां उनका दबदबा है और जहां वे प्रभावी नहीं हैं वहां सीटें मांगना गलत है. महाराष्ट्र के सोलापुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार ने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को हराने के लिए जो विपक्षी दल एकजुट हुए उन्हें सत्ता से हटाने तक चैन से नहीं बैठना चाहिए।
इन नसीहतों के बीच इंडिया गठबंधन में शामिल आरजेडी के प्रमुख लालू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार से मुलाकात की. बिहार में सीट बंटवारे को लेकर आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस और लेफ्ट में तकरार देखने को मिली है. हालांकि गठबंधन के नेताओं ने इन दावों को खारिज किया है. बैठक के बाद अपने आवास पर लौटे तेजस्वी यादव ने कहा कि दरार की अफवाहें ‘‘जमीनी हकीकत’’ से अलग हैं. उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे दुख होता है जब आप लोग ऐसे सवाल पूछते हैं जो जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग होते हैं. आखिर इस बात को लेकर इतनी उत्सुकता क्यों है कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा कब अंतिम रूप ले सकता है? क्या बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने इसे अपने खेमे में सुलझा लिया है?