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बरेली: से तो सर्द मौसम को हेल्दी सीजन माना जाता है कि लोग ठंड में कम बीमार पड़ते हैं, लेकिन अत्यधिक ठंड बढ़ गई तो बीमार होने वालों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी के मरीजों में 40 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जो ठंड की चपेट में आने से बीमार हुए। यहीं कारण है कि डॉक्टर मरीजों को सुझाव दे रहे हैं कि वे ठंड से बचने की हर संभव कोशिश करें।

ठंड बढ़ने से सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ कोल्ड डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। ठंड लगने से उल्टी दस्त और पेट दर्द के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही हार्ट अटैक और सांस संबंधी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। थोड़ी भी चूक होने पर लोग ठंड की चपेट में आ रहे हैं और उनकी स्थिति गंभीर भी हो जा रही है।
गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। बीमार होने वालों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। उनकी सेहत का ध्यान रखते हुए उन्हें ज्यादा समय तक घर के अंदर रखा जा रहा है ताकि गलन भरी हवाओं से वे बीमार न हो। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, जबकि सुगर के मरीजों की परेशानी भी बढ़ रही है।
हार्ट के मरीजों को सांस की तकलीफ
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आसिफ शकील ने कहा कि हार्ट के पुराने मरीजों की बीमारी बढ़ जा रही है। उनका हार्ट पहले से कमजोर है, जबकि ठंड के कारण कफ बनने से छाती में भी इंफेक्शन हो रहा है। ऐसे मरीजों को गर्म पानी का भाप लेना चाहिए और स्पाइरोमीटर चलाना चाहिए ताकि सांस की तकलीफ न हो। मॉर्निंग वॉक करने वाले मरीजों को दोपहर में टहलना चाहिए।
मौसम की चपेट में आने से हुए बीमार
जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. बीके सुमन ने कहा कि अस्पतालों में जितने मरीज इलाज कराने आ रहे हैं, उनमें 40 प्रतिशत लोग ठंड की चपेट में आने से बीमार हुए हैं। यदि छाती में दर्द के साथ सांस फूलना, चक्कर आना, मरीज बेहोशी की हालत में हो तो हार्ट अटैक हो सकता है, जबकि सुगर के मरीजों में छाती के दर्द को छोड़कर अन्य लक्षण हो तो वह मरीज गंभीर स्थिति में जा रहा है। ऐसे मरीजों को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
मेडिकल कॉलेज हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सिंह ने कहा कि हार्ट अटैक में सीपीआर बहुत आवश्यक कड़ाके की ठंड में हार्ट के मरीज बढ़ गए हैं। ओपीडी के 70-80 मरीजों में 8 -10 मरीज हार्ट अटैक वाले हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल सीपीआर देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। आम आदमी को भी सीपीआर देने का तरीका सीखना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर मरीज की छाती को हाथों से दबाकर और मुंह में सांस देकर जान बचा सके।
इस कारण खराब हो रही तबीयत
ब्लोअर और रूम हीटर के पास अधिक समय रहने वाले लोग बाहर निकलते हैं तो तापमान कम रहता है। इससे सेहत खराब हो जाती है।
धुआं वाले अलाव के पास बैठने से हार्ट और सुगर के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है।
बीमार मरीज को अस्पताल तक ले जाने में भी ठंड लग जाती है तो तबीयत और खराब हो जाती है।
ठंड मौसम में अपर्याप्त गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकलने पर सेहत खराब हो रही है।
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