आग लगने की घटनाओं से मंडी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान जरूर उठने लगे
आठ माह बाद भी अग्नि हादसे का नहीं बना पंचनामा

भोपाल: कुसमेली कृषि उपज मंडी में हाल ही में लगी आग से व्यापारी का बारदाना और मक्का चपेट में आ गया. अधिक नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन ऐसी घटनाओं से मंडी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान जरूर उठने लगे हैं.
दरअसल, मंडी में इसके पहले भी आग लग चुकी है. आग मंडी कार्यालय के एक कक्ष में लगी और इतनी तेज भड़की कि कई दस्तावेज खाक हो गए, लेकिन मंडी के उस कक्ष का आज तक पटवारी पंचनामा नहीं हुआ. इस वजह अब तक मंडी के उस कमरे को न तो खोला जा सका है, न ही साफ सफाई हो सकी.
अप्रेल के दूसरे पखवाड़े में लगी आग का कारण शार्ट सर्किट बताया गया था. बिजली की उलझे तारों के गर्म होने से निकली चिंगारी फाइलों तक पहुंच गई और सब कुछ जल गया. यह आग भी देर रात ही लगी थी. मंडी प्रबंधन ने इस घटना से सीख नहीं ली. न तो उलझे तारों के जाल को ठीक किया गया, न ही अग्निशमन उपकरणों को खरीदने की प्रक्रिया पूरी की गई.

आग लगने के बाद कक्ष में वैसे ही ताला नहीं खोला गया. जब क्षेत्र के पटवारी वहां पहुंचकर पंचनामा बनाकर अपना प्रतिवेदन तैयार कर लेंगे, उसके बाद ही मंडी प्रबंधन उस कक्ष की साफ सफाई पुताई एवं बिजली फिटिंग नए सिरे से करके कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था करेगा. फिलहाल मंडी के कई दो-तीन विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था आठ माह से एक ही हाल मेें हो रही है.
पटवारी पंचनामा नहीं होने के कारण अब तक उस कक्ष को नहीं खोला जा सका है. पटवारी मना तो नहीं करते लेकिन मंडी पहुंच भी नहीं रहे हैं. अग्निशमन उपकरणों को खरीदने की तैयारी थी, लेकिन आचार संहिता के कारण टेंडर नहीं किया जा सका है.
सुरेश कुमार परते, सचिव कृषि उपज मंडी कुसमेली