
शिमला। बरसात के दौरान शिमला शहर में सैकड़ों पेड़ गिरे हैं। सबसे ज्यादा पेड़ नगर निगम की जमीन और क्षेत्र में ही गिरे हैं। इन पेड़ों को हटाने और काटने को लेकर नगर निगम ने ही पूरा खर्च किया है, लेकिन नगर निगम को अभी भी इसका कोई लाभ ही नहीं मिला है। वन विभाग ने यह दावा किया था कि नगर निगम के क्षेत्र में जो भी पेड़ गिरते हैं, उन्हें नगर निगम को ही सौंपा जाना है, लेकिन अभी भी वन विभाग ने नगर निगम को एक भी पेड़ नहीं दिया है। हालांकि नगर निगम ने वन विभाग से इन पेड़ों की मांग भी की है। शहर के कनलोग क्षेत्र में श्मशानघाट के पास भी पेड़ों के ढेर लगे पड़े हैं। इसका कोई इस्तेमाल भी नहीं किया जा रहा है। पार्षदों का कहना था कि यहां पर पहले भी सलीपर रखे गए थे, जो सड़ कर खराब हो गए, लेकिन उन्हें कहीं भी इस्तेमाल में नहीं लाया गया। ऐसे में यदि इन कीमती लकडिय़ों को भी इस्तेमाल में नहीं लाया जाता है तो नगर निगम सहित वन विभाग को भी इसका लाखों का नुकसान झेलना पड़ेगा। बता दें कि शहर में जो भी पेड़ गिरे हैं।

वह सभी वन विभाग की संपत्ति होती है। इसमें किसी भी अन्य विभाग का कोई अधिकार नहीं होता है, लेकिन यदि नगर निगम अपनी जमीन पर गिरे पेड़ों के दस्तावेज वन विभाग को सौंपता है तो वन विभाग नगर निगम को वह पेड़ सौंप देगा। हालांकि इसको लेकर अभी तक नगर निगम ने वन विभाग को कोई दस्तावेज नहीं सौंपे हैं, लेकिन निगम का प्रश्न है कि यदि वन विभाग निगम को कोई पेड़ नहीं देता है तो पेड़ों को काटने और उठाने को लेकर नगर निगम का खर्च क्यों किया गया। यदि यह सारी वन संपत्ति वन विभाग की है तो वन विभाग ने ही इन्हें उठाने और काटने का खर्च क्यों नहीं किया। ऐसे में वन विभाग को यह पेड़ नगर निगम को सौंप देने चाहिए। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यदि गिरे पेड़ों को नगर निगम को सौंपा जाता है तो नगर निगम को इसकी लाखों की इनकम हो जाएगी। इससे जहां निगम अपनी आर्थिकी सुधार सकता है। वहीं, शहर के विकास कार्य में भी इसका लाभ होगा। इसके अलावा नगर निगम की खस्ताहाल इमारतों की मरम्मत के लिए भी यह लकड़ी काम आ सकती है। हालांकि इस पर कंगनाधार वार्ड के पार्षद राम रतन वर्मा ने भी प्रस्ताव रखा है। इसको लेकर निगम हाउस में भी वन विभाग से बात करने की बात कही गई है।
शहर में जो भी पेड़ गिरे हैं उसको काटने और उठाने का सारा खर्च नगर निगम ने ही किया है। ऐसे में नगर निगम अब वन विभाग से गिरे पेड़ों की जानकारी लेकर उन्हें वापिस लेगा। इससे नगर निगम को काफी लाभ भी मिलेगा।
भूपेंद्र अत्री, आयुक्त नगर निगम शिमला