
कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे सीरियल किलर जयनंदन को दो दिन की एस्कॉर्ट पेरोल दिया है। इस फैसले की वजह है जयनंदन की लिखी किताब। इस किताब की लांचिंग के लिए ही उसे पैरोल मिली है। जयनंदन को पैरोल दिलाने के लिए उसकी बेटी ने काफी कोशिश की थी। जज ने भी अपने फैसले में बेटी की तारीफ की है। 56 साल का जयनंदन हत्या के पांच मामलों में सजा काट रहा है। उसने केरल के त्रिसूर-एर्नाकुलम के आसपास इन घटनाओं को अंजाम दिया था।

जयनंदन त्रिवेंद्रम की सेंट्रल जेल से जून 2013 में भाग निकला था। बाद में सितंबर 2013 में वह फिर से पकड़ा गया था। इससे पहले भी वह कन्नूर जेल से भागा था, लेकिन पकड़ा गया था। उसकी पत्नी ने पैरोल के लिए याचिका दायर की थी। इसके लिए उसकी बेटी कीर्ति कोर्ट के सामने प्रस्तुत हुई थी। पैरोल देते हुए जज ने लिखा कि यह फैसला जयनंदन की बेटी और पत्नी के लिए दिया जा रहा है। बेटी अपने पिता से बहुत ज्यादा प्यार करती है। वह चाहती है पिता अपनी किताब की लांचिंग पर मौजूद रहें। इससे पहले मार्च में उसकी बेटी ने अपनी शादी में मौजूद रहने के लिए पिता के लिए दो दिन की पैरोल ली थी।
कोर्ट ने आगे कहाकि एक बेटी की अपने पिता के लिए कानूनी लड़ाई तारीफ के काबिल है। इस बात के कोई मायने नहीं रह जाते कि उसके पिता पांच हत्याओं समेत विभिन्न मामलों में दोषी हैं। कोर्ट ने आगे कहाकि एक मां की तरह एक पिता भी अपनी बच्चों के लिए हीरो होते हैं। जज ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि जयनंदन जो कि मात्र नौवीं तक पढ़ा है, उसने 17 साल जेल में रहते हुए किताब लिख डाली। जयनंदन की किताब ‘पुलारी विरियुम मुनपे’ 23 दिसंबर को एर्नाकुलम प्रेस क्लब में रिलीज होने वाली है। उसने कहा है कि उसकी किताब से होने वाली आय जरूरतमंद बच्चों को दी जाएगा।